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अंर्तराष्ट्रीय सनातन परिषद के बारे में

अंर्तराष्ट्रीय सनातन परिषद भारत का एक सनातन विचारधारा से प्रेरित राष्ट्रवादी संगठन है। अंर्तराष्ट्रीय सनातन परिषद की स्थापना उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 06-01-2021 को श्री मयंक श्रीवास्तव जी द्वारा की गयी। सनातन धर्म की मूल विचार धारा वसुधैव कुटुंबकम को मूल में रखते हुए हिन्दू धर्म से जाती पाती रंग भेद सम्प्रदाय भेद मिटाकर एकल सनातन समाज का निर्माण कर भारत को अखंड भारत के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से अंर्तराष्ट्रीय सनातन परिषद की नींव राखी गयी। अंर्तराष्ट्रीय सनातन परिषद का उद्देश्य समाज को एक ऐसा मंच प्रदान करना है जिसमे हर सनातनी हिन्दू बिना किसी उंच नीच या अन्य भेद भाव के एक परिवार, एक कुटुंब की भांति एक दुसरे का पूरक बन सके।

साथ ही साथ अंर्तराष्ट्रीय सनातन परिषद भारत और भारत की सीमाओं के आगे भी जहाँ-जहाँ हिन्दू बस्ते है एक ऐसे समाज की रचना करना चाहता है जिसमे अपने गौरवशाली इतिहासका गर्व हर बालक, हर व्यक्ति में हो और सनातन संस्कृति को भी विश्व में एक प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त हो।

आज के युवाओं को शारीरिक मानसिक व आत्मिक रूप से सुदृढ़ और बलवान बनाकर राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करने का कार्य भी अंर्तराष्ट्रीय सनातन परिषद अपने विभिन्न कार्यक्रमों द्वारा करना प्रारम्भ कर चूका है। इनमें स्वस्थ्य शिविरों और योग कैम्पों का क्रियान्वयन, इत्यादि प्रमुख है। सर्वसमाज के स्वस्थ्य के लिए व्यायामशालाओं का युवाओं हेतु वाचनालयों और पुस्तकालयों का निर्माण और निशुल्क स्वास्त्य परामर्श केंद्रों का स्थापन संगठन के अगले कुछ मुख्य कार्यों में से होगा।

युवाओं को रोज़गार प्रदान करने हेतु अंर्तराष्ट्रीय सनातन परिषद द्वारा ASP ट्रेडर्स & मनुफैक्टरर्स का भी गठन किया गया है जिस के द्वारा स्वस्थ्य व स्वछता से सम्बंधित उत्पादों को न सिर्फ निर्माण किया जायेगा बल्कि हर जिले तक एक सप्लाई चैन की भी निकट भविष्य में स्थापना की जाएगी जिसमे अनेकों लाभार्थियों को रोज़गार और व्यापार के अवसर प्रदान किये जायेंगे। आगे भविष्य में संगठन का उद्देश्य ग्राम स्तर तक अपनी पहुंच स्थापित कर छोटे छोटे स्वयं सहायता समूह, महिला समूहों को कुटीर उद्योगों से लाभान्वित करना भी होगा।

अंर्तराष्ट्रीय सनातन परिषद द्वारा लोक तंत्र के चौथे स्तम्भ पत्रकारिता को सम्बल प्रदान करने के लिए पत्रकारों को यथा संभव सहयोग व हौसला प्रदान करने के लिए अंर्तराष्ट्रीय सनातन परिषद पत्रकार संघ का भी गठन किया जा चुका है। और ये अत्यंत गर्व का विषय है की आज विभ्भिन्न मीडिया हाउसेस फिर चाहे वो प्रिंट मीडिया हो, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हो या नए ज़माने के छोटे बड़े पोर्टल सभी बड़ी ही उत्सुकता से अंर्तराष्ट्रीय सनातन परिषद पत्रकार संघ से जुड़ना शुरू कर चुके हैं।

अंर्तराष्ट्रीय सनातन परिषद द्वारा जल्द ही अंर्तराष्ट्रीय सनातन परिषद पत्रकार संघ की तरह ही अंर्तराष्ट्रीय सनातन परिषद विधिक संघ का भी गठन करने का लक्ष्य सुनिश्चित किया गया है। जिसके द्वारा भारतीय गणराज्य के हर नागरिक को सरल और सस्ती कानूनी मदद उपलब्ध कराई जा सके। आज भारतीय जनता में से एक बड़ा तबका न्यायिक सेवाओं का सही समय पर साथ नहीं पा पाता है जिससे भारतीय गणराज्य की संवैधानिक भावना को कहीं न कहीं चोट पहुँचती है।

अंर्तराष्ट्रीय सनातन परिषद द्वारा आर्थिक कमज़ोरी का शोषण कर विभिन मिशनरी व इस्लामिक केंद्रों व धर्माधिकारियों द्वारा जो धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है उसके विरुद्ध भी सशक्त रूप से मुहीम चलाते हुए हर व्यक्ति को पुनः अपनी पुरातन पहचान दिलाना भी शुरू किया गया है। सरकारी व न्यायिक मदद लेकर भारत की मूल धार्मिक व जातीय गड़ना को अक्षुण रखना भी अंर्तराष्ट्रीय सनातन परिषद्के उद्देश्यों का एक महत्त्वपूर्ण भाग है। हिन्दू मंदिरों पर से सरकारी नियत्रण को ख़तम करवाना, सनातन वैदिक शिक्षा को सरकारी कॉम्पिटिशन व अन्य परीक्षाओं का हिस्सा बनवाना, गीता व रामायण जैसे ग्रंथों का वैदिक धर्म पुराणों का नवीन शिक्षा के साथ संयोजित करते हुए नए विद्याध्ययन का सार बनवाना भी संगठन का ध्येय है ताकि हर बालक को नयी शिक्षा पदत्ति के साथ साथ अपने गौरवशाली संस्कारों व संस्कृति का भी भान कराया जा सके।

वैसे तो बहुत कुछ है कहने को, करने को परन्तु यदि हम अपने जीवन में कुछ भी सेवा कर पाएं राष्ट्र की, धर्म की तो यह जीवन सफल होगा।



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आधुनिकता के परिपेक्ष्य में भारतीय संस्कृति एवं नैमिषारण एक ऐतिहासिक अध्धयन पुस्तक का विमोचन।
लखनऊ : भारत के दिव्य धाम नैमिषारयण के ऊपर लेखिका डॉ० सरला अवस्थी की लिखी पुस्तक आधुनिकता के परिपेक्ष्य में भारतीय संस्कृति एवं नैमिषारण एक ऐतिहासिक अध्धयन के विमोचन का आयोजन अंर्तराष्ट्रीय सनातन परिषद द्वारा कराया गया। डॉ० सरला अवस्थी ने बताया पुस्तक में नैमिषारण्य का महातम्य और आधुनिक भारत के लिए उसकी प्रासंगिकता पे प्रकाश डाला गया है। आचार्य शिव तीर्थ  महाराज द्वारा दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। नैमिष ग्रंथ की विशेषताओं पर विवेचना करते हुए उन्होंने बताया कि मनु सतरुपा की तपस्थली, माँ सती का हृदय स्थल माता ललिता देवी,निमिष मात्र में ब्रह्मा के द्वारा छोड़े गए मनोमय चक्र द्वारा अरण्य का पता 18 पुराणों के रचनाकार व्यास जी एवं अनेक आध्यात्मिक बिंदुओं पर प्रकाश डाला। साधना मिश्रा ने अपने सरल काव्य रचना से डॉ सरला अवस्थी की अभिरुचियों की अभिव्यक्ति प्रस्तुत की। ललिता मिश्रा ने लेखिका के प्रेरक एवं अपने पिता की प्रति अपनी काव्य भावांजलि दी। पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में पुस्तक की लेखिका डॉ० सरला अवस्थी, ललिता मिश्रा विभागाध्यक्ष हिंदी अबुधाबी, मयंक श्रीवास्तव संस्थापक व अध्यक्ष अंर्तराष्ट्रीय सनातन परिषद व अंर्तराष्ट्रीय सनातन परिषद पत्रकार संघ, सोना श्रीवास्तव, मृदुल अवस्थी, शुचिता मिश्रा, कवी घनश्याम मिश्रा, साधना मिश्रा सहित तमाम गणमान्य जन उपस्थित रहे।

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